हमारा इशलाम धर्म. ...... चोरी करने वालो को हाथ काटने की सजा का हुक्म देता हैं .... लोगो की माल जो लूटले चाहे किसी भी तरह तो इशलाम मे सजा का प्रावधान हैं । देखो इस सम्बन्ध मे कुरआन क्या कहता हैं ....
अन्याय और नाइंसाफी
“अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतों को उनके हक़दारों तक पहुँचा दिया करो। और जब लोगों के बीच फ़ैसला करो, तो न्यायपूर्वक फ़ैसला करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी नसीहत करता है। निस्संदेह, अल्लाह सब कुछ सुनता, देखता है।“
(अल क़ुरआन 4:58)
“ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह के लिए ख़ूब उठनेवाले, इनसाफ़ की निगरानी करनेवाले बनो और ऐसा न हो कि किसी गरोह की शत्रुता तुम्हें इस बात पर उभार दे कि तुम इनसाफ़ करना छोड़ दो। इनसाफ़ करो, यही धर्मपरायणता से अधिकनिकट है। अल्लाह का डर रखो, निश्चय ही जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह को उसकी ख़बर है।“ (अल क़ुरआन 5:8)
लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ......यजुर्वेद में चोरों, तस्करों और डाकुओं को भी नमन किया गया है ।
उदाहरण के लिए देखिए
यजुर्वेद अध्याय 16, मंत्र 21
नमो॒ वञ्च॑ते परि॒वञ्च॑ते
अर्थात, छल से दूसरों के पदार्थों का हरण करने वाले और ......सब प्रकार से कपट के साथ व्यवहार करने वाले को प्रणाम
स्तायू॒नां पत॑ये॒ नमो॒
चोरों के अधिपति को प्रणाम
तस्क॑राणां॒ पत॑ये॒ नमो॒
तस्करी/डकैती करने वाले के अधिपति को प्रणाम
आशा है कि आर्य लंडूरे .. वेद की इन शिक्षाओं पर भी टिपण्णी करेंगे ।
लेकिन मीडिया इस्लाम की ग़लत तस्वीर पेश करता है .....इस्लाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है ....लेकिन असल बात यह है कि ...आज मीडिया की नकेल कुछ उन पश्चिम वालों के हाथों में है,. ... जो इस्लाम से द्वेष व शत्रुता रखते हैं। .....मीडिया बराबर इस्लाम के विरुद्ध बातें प्रकाशित और प्रसारित करता है। .....वह या तो इस्लाम के विरुद्ध ग़लत सूचनाएँ उपलब्ध कराता है. ... और इस्लाम से संबंधित ग़लत-सलत उद्धरण देता है या. .... फिर किसी बात को जो मौजूद हो ग़लत दिशा देता और उछालता है।
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